शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

।। अनुभूति रहस्य ।।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
प्रेम के क्षणों में
तुममें से उठे सवालों का जवाब देना चाहती हूँ
तुम्हारे हृदय का रिसता-रस
मेरे प्रणय का रस है
जो तुमसे होकर मुझ तक पहुँचता है

प्रेम एकात्म अनुभूतियों की
अविस्मरणीय दैहिक पहचान है
प्रेम में मन
सपने सजाता है तन के लिए
और तन जन्म देता है
मन के लिए पुखराजी-सपनें

प्रेम में
मन-तन धरती से समुद्र में
बदल जाता है
और समा जाते हैं
एक-दूसरे में
अनन्य राग
अनुराग की साँसों में

माटी से पानी में
बदल जाती है पूरी देह
देह के भीतर के
बर्फीले पहाड़
बादल की तरह उड़ने लगते हैं
देहाकाश में
इंद्रधनुषी इच्छाओं के बीच

प्रेम में भाषाओं का
कोई काज नहीं होता है
'प्रेम' ही 'प्रेम' की भाषा है
देश-काल की सीमाओं से परे ।

('रस गगन गुफा में अझर झरै' शीर्षक कविता संग्रह से)

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